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सूचना का अधिकार 2005 के अधीन Uptodate 12-06-2020  

लोक प्राधिकारी द्वारा, प्रकाशित सूचना 

निबंधक, फर्म सोसाइटीज एंव चिट्स, उत्तराखण्ड 

अनिकेत विहार दून यूनिवर्सिटी रोड, पो00 डिफेन्स कालोनी देहरादून 

विषय सूची 

क्र0 सं0

            विषय           

    पृष्ठ संख्या

1

मैनुअल - 01 (संगठन की विशिष्टियाँ)

पृष्ठ 01 से 02 तक

2

मैनुअल - 02 (अधिकारियों कर्मचारियों की शक्तियाँ और कर्तव्य)

पृष्ठ 03 से 04 तक

3

मैनुअल – 03 विनिश्चय करने की प्रक्रिया

पृष्ठ 04 से 6 तक

4

मैनुअल - 04 (सोसाइटी एक्ट 1860 के अन्तर्गत निर्धारित शुल्क)

पृष्ठ 6

5

मैनुअल - 05 (कार्यालय अभिलेख तथा सूचना का अधिकार)

पृष्ठ 7 से 8 तक

14

मैनुअल - 06 (दस्तावेज आदि जो लोक प्राधिकारी द्वारा धारित है।

पृष्ठ 8

15

मैनुअल – 07 (किसी व्यवस्था की विश्ष्टिियाॅ जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध मे जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए विद्यमान है)

पृष्ठ 8

16

मैनुअल – 08 (ऐसे बोर्डो परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के विवरण जिनमें दो या अधिक व्यक्ति है जिनका उसके भाग रूप या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन हेतु गठन किया गया है)

पृष्ठ 8

17

मैनुअल - 09 (अधिकारियों कर्मचारियों की निर्देशिका आदि।

पृष्ठ 9

18

मैनुअल - 10 (अधिकारी कर्मचारी का मासिक पारिश्रमिक आदि)

पृष्ठ 10

19

मैनुअल - 11 ( बजट )

पृष्ठ 11

20

मैनुअल – 12 (सहायिक कार्यक्रमों के निष्पादन की रीति जिसमें आंवटित राशि और ऐसे कार्यक्रमों के लाभार्थियों के ब्यौरे सम्मिलित है।)

पृष्ठ 11

21

मैनुअल – 13  (रियासतों, अनुज्ञापत्रों तथा प्राधिकारों के प्राप्तिकर्ताओं के संबंध में)

पृष्ठ 11

22

मैनुअल – 14  (किसी इलेक्ट्रोनिक रूप में सूचना के संबंध में ब्यौरें)

पृष्ठ 11

23

मैनुअल – 15  (सूचना अभिप्राप्त करने के लिए नागरिकों को उपलब्ध सुविधा)

पृष्ठ 12

24

मैनुअल - 16 (लोक सूचना अधिकारियों के नाम व पते)

पृष्ठ 12

(मैनुअल संख्या-01)

संगठन की विशिष्टियां, कृत्य और कर्तव्य

(The particulars of its organisation, functions and duties)

          ·            प्रत्येक लोक प्राधिकारी की कार्य-प्रणाली में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के संवर्धन के लिये लोक प्राधिकारियों के नियंत्रणाधीन सूचना नागरिकों की पहुंच तक सुनिश्चित करने के लिए नागरिकों को सूचना का अधिकार की व्यवहारिक शोषण पद्धति स्थापित करने हेतु केन्द्रीय सूचना आयोग तथा राज्य सूचना आयोगों का गठन करने और उससे सम्बन्धित आनुषंगिक विषयों का उपबन्ध करने के लिएभारतीय संविधान के अनुरूप सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 बनाया गया है। इस अधिनियम के प्राविधानों के अनुरूप निबंधक, फर्म, सोसाइटीज एवं चिट्स, उत्तराखण्ड के संगठन का स्वरूप, विषेषतायें और कर्तव्य की संरचना अग्रवत हैः-

          ·            उत्तर प्रदेश पुर्नगठन अधिनियम 2000 के अधीन उत्तरांचल राज्य की स्थापना दिनांक ़09-11-2000 को की गयी। जिसमें राज्य की विभिन्न कार्यकारी व्यवस्थाओं के अधीन उत्तरांचल शासन के वित्त विभाग के अधीन निबंधक, फर्म, सोसाइटीज एवं चिट्स, उत्तराखण्ड के कार्यालय के सृजन का निर्णय लिया गया जो , अनिकेत विहार, दून यूनिवर्सिटी रोड,पो0ओ0 डिफेन्स कालोनी, देहरादून में स्थापित है।

राज्य स्तरीय मुख्यालय देहरादून 

कार्यालय  निबन्धक,

फर्म सोसाईटीज एण्ड चिट्स, उत्तराखण्ड          निबन्धक/अपीलीय अधिकारी- श्री भूपेश चन्द्र तिवारी

अनिकेत विहार, दून यूनिवर्सिटी रोड़, देहरादून।     उप निबंधक-श्री संजीव कुमार सिंह

 

दूरभाष : 9410789438

वेबसाइट- http:society.uk.gov.in

मेल- regfscddn@gmail.com        

 

 

निबन्धक,फर्म सोसाइटी एंव चिट्स,उत्तराखण्ड, के अन्तर्गत सृजित

पदों का विवरण)

क्र0सं0

पदनाम

निबन्धक कार्यालय

क्षेत्रीयकार्यालय, देहरादून

क्षेत्रीयकार्यालय

हल्द्वानी

वेतनमान एंव ग्रेड वेतन रूपये मे (दिनांक 1-1-2016 से पुनरीक्षित)

1

2

3

4

5

6

1

निबन्धक

01

-

-

131100-216600, लेवल 13क

2

उप निबन्धक

01

-

01

67700-208700, लेवल 11क

3

सहायक निबन्धक

01

-

-

56100-177500, लेवल 10क

4

प्रशासनिक अधिकारी

01

-

-

44900-142400, लेवल 7क

5

प्रधान सहायक

-

01

01

35400-112400, लेवल 6क

6

वरिष्ठ सहायक

02       

01       

01

29200-92300, लेवल 5क

7

चिट् आॅडिटर        

-

01

01

25500-81100, लेवल 4क

8

आशुलिपिक

-

01

01

25500-81100, लेवल 4क

9

कनिष्ठ सहायक

-

03

03

21700-69100, लेवल 3क

10

कार्यालय सहायक सह

डाटा इन्ट्री आॅपरेटर

01

-

-

19900-63200, लेवल 2क

11

फोटो मशीनआॅपरेटर

-

01

01

18000-56900, लेवल 1क

12

अनुसेवक

-

03

02

18000-56900, लेवल 1क

13

चैकीदार

01

01

01

18000-56900, लेवल 1क

 

योग:-

07       

13

12

 

          ·            निबन्धक संगठन के विभागाध्यक्ष तथा सूचना का अधिकार हेतु अपीलेंट अथोरिटी हैं। वर्तमानसमय में निबंधक तथा सहायक निबंधक क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून का एकीकृत कार्यालय (Integrated Office)जो अनिकेत विहार, दून यूनिवर्सिटी रोड, देहरादून में स्थित है। उपनिबन्धक क्षेत्रीय कार्यालय कुमांऊ मण्डल वर्तमान में हीरा नगर,निकट विद्युत कार्यालय, उत्थान मंच मुखानी हल्द्वानी जनपद नैनीताल मंे स्थित है। शेष 11 अन्य जनपदों में अधिष्ठान संबंधी कोई पद नही है, इन जनपदों में कोषागार के नियमित कार्मिको के द्वारा ही इस विभाग का कार्य किया जा रहा है, जिनके लिए शासन द्वारा निर्धारित रू 175/- प्रति कार्मिक मानदेय दिया जा रहा है ।

संगठन के कृत्य और कत्र्तव्य

          ·            यह संगठन सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860, इंडियन पार्टनरशिप एक्ट 1932 तथा चिट्स फण्ड एक्ट 1982 के अधिनियमों के अन्र्तगत अपने कार्यों का निर्वहन करता है। वर्तमान समय में, इस संगठन द्वारा उत्तराखण्ड राज्य में सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860, इंडियन पार्टनरशिप एक्ट 1932 तथा चिट्स फण्ड एक्ट 1982 के प्राविधानों के अन्तर्गत ही संस्थाओ, फर्मों तथा चिट्स का पंजीकरण तथा नवीनीकरण किया जाता है।

         ·            सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 एक केन्द्रीय एक्ट है तथा इस एक्ट के अन्तर्गत विभिन्न प्रकारकी चैरिटेबल एवं अब्यवसायिक संस्थायें पंजीकृत की जाती है। यह एक्ट पूरे भारतवर्ष में समान रूप सेलागू है तथा इसमें समय- समय पर राज्यों द्वारा अपनी आवश्यकतानुसार संशोधन आदि किया जाता है।प्रत्येक राज्य की नियमावली भी अलग- अलग है। उत्तराखण्ड राज्य में भी पूर्ववर्ती उत्तर प्रदेश में प्रचलित नियमावली के साथ उत्तराखण्ड राज्य के द्वारा संशोघित नियम भी लागू है । इस अधिनियम के अन्तर्गत चैरिटेबिल संस्थाओं का पंजीकरण होता है।

 (मैनुअल संख्या-02)

अधिकारियों और कर्मचारियों की शक्तियां और कत्र्तव्य

(The powers and duties of its officers and employees)

संविधान के अनुच्छेद 154 के अधीन राज्य के कार्यकारी अधिकार राज्यपाल में निहित है और उन अधिकारों का प्रयोग संविधान के अनुसार राज्यपाल द्वारा अथवा उनके अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से किया जाता है । संविधान के अनुच्छेद 166 के अनुसार शासन के समस्त कार्य राज्यपाल के नाम से किये गये अभिव्यक्त किये जायेंगे।संविधान के अनुच्छेद 154 के अन्तर्गत और उसके उपबंधों के अधीन रहते हुए शासन के अधीनस्थ किसी अधिकारी को कुछ सीमा तक और ऐसे प्रतिबंधों के साथ-साथ जिन्हें शासन लगाना आवश्यक समझें अथवा जो संविधान या शासन के नियम अथवा आदेशों या राज्य विधान मण्डल के किसी अधिनियम के उपबंधों द्वारा पहले से लगाये गये हों, प्रतिनिहित किये जा सकते हैं । अतःराज्य के वित्तीय अधिकारों का प्रतिनिधायन विभागाध्यक्षों को किया गया है।

इस संगठन में नियमित रूप से कार्यरत कर्मचारी राजकीय कर्मचारी हैं तथा कुछ कर्मचारियों को उपनल/पीआरडी से संविदा के आधार पर भी लिया गया है। संगठन के शीर्ष अधिकारी/विभागाध्यक्ष निबन्धक (रजिस्ट्रार) हैं। संगठन के अधिकारियों तथा कर्मचारियों का विवरण मैनुअल संख्या-09 में दिया गया है। इन अधिकारियों एवं कर्मचारियों की शक्तियां एवं कत्र्तव्य निम्न प्रकार से हैंः-

निबन्धक, (Registrar):-

(1) निबन्धक (रजिस्ट्रार) संगठन के विभागाध्यक्ष हैं। उन्हें राज्य सरकार द्वारा विभागाध्यक्ष के समस्त प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार

(2) निबन्धक को सोसाइटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1860 के प्राविधानों के अनुसार सोसाइटी से सूचना मंगाने, सोसाइटी के अभिलेखों की जांच तथा लेखा-परीक्षा रिपोर्ट उपलब्ध कराना

(3) कतिपय परिस्थितियों में रजिस्ट्रार को सोसाइटी के रजिस्ट्रीकरण को रद्द करने तथा सोसाइटी के विघटन

(4) रजिस्ट्रार को विशिष्ठ परिस्थितियों में किसी भी सोसाइटी के काम काज का अन्वेषण करने,सोसाइटी के किसी अधिकारी/कर्मचारी को बुलाकर शपथ के आधार पर उनका परीक्षण करने का अधिकार प्राप्त होता है।

(5) उक्त अधिनियम के क्रियान्वयन की नीति आदि का निर्धारण विभागाध्यक्ष/निबंधक द्वारा किया जाता है

वित्तीय हस्तपुस्तिका भाग-1 के पैरा 19 के अनुसार विभागाध्यक्षों को निम्न अधिकार प्रदत्त हैंै।:-

वाल्यूम -1 मंे विभागाध्यक्ष को प्रदत्त सभी अधिकार प्राप्त है उनके अपने कार्यालयों अथवा उनके अधीनस्थ कार्यालयांे के प्रयोग के लिए पुस्तकें समाचार पत्र, पत्रिकाएं  तथा अन्य प्रकाशन खरीदने का पूर्ण अधिकार ।

2.संदर्भ पुस्तकें व शुद्धि पत्र उनके अपने कार्यालयों में तथा उनके अधीनस्थ कार्यालयों में प्रयोग के लिए राजकीय मुद्रणालय से सीधे प्राप्त करना

3 विभागीय कार्य यथा निविदा, विभागीय सूचना आदि के विज्ञापन के लिए व्यय स्वीकृत करने का पूर्ण अधिकार है।

4.शासन द्वारा पटटे पर ली गयी भूमि के किराये का भुगतान स्वीकृत करना।

5. आवश्यक प्रयोजनों (गोदामों को छोडकर) के लिए किराये पर लिये गये भवनों का किराया स्वीकृत करना ।

6.शासनादेश संख्या 129/XXVII(7)32/2007 वित्त अनुभाग-7, दिनांक 14/7/2017 रु0 2.50 लाख तक लेखन सामग्री क्रय

लेखन सामग्री एंव अन्य सामग्री क्रय करनाः-एक बार में रु0 तीन लाख तक (रु0 25,000/- तक बिना कोटेशन के, रु025001/- से रू 2,50,000/-तक कोटेशन के आधार पर तथा रु0 2,50,000/- से अधिक टेण्डर आमंत्रित करने का पूर्ण अधिकार)।

उक्त के क्रम में किसी मानक मद में बजट कम होने पर पुनर्विनियोग के माध्यम से या अतिरिक्त मांग द्वारा शासन को प्रस्ताव भेजकर धनराशि पुनः आवंटन करने का अनुरोध किया जाता है तथा अतिरिक्त आवंटन प्राप्त होने पर ही आवश्यक अतिरिक्त भुगतान किये जाने की प्रक्र्रिया है। समय-समयपर शासन द्वारा वेतन एवं तद्संबंधी भत्तों का बजट आवंटन की प्रतीक्षा में व्यय करने की अनुमति प्रदान की जाती है अथवा वेतन से संबंधित सभी मानक मदों में उपलब्ध बजट को जोडकर कर्मचारियों के वेतन भुगतान करने की अनुमति प्रदान की जाती है, ताकि वेतन वितरण में विलम्ब न हो।

नियमगत शक्तियों और कर्तव्य का विवरण:-

1.                    वित्तीय नियम संग्रह खण्ड पांच भाग -1 में विभागाध्यक्ष, कार्यालयाध्यक्ष एवं आहरण वितरण अधिकारियों को प्रदत्त दायित्व का निर्वहन तथा निर्धारित प्रपत्रों पर लेखा सम्बन्धी विवरण तैयार करना तथा यथा आवश्यक वांछित स्तरों को सूचना भेजने

2.                    वित्तीय नियम संग्रह खण्ड-3 के प्राविधानों के अधीन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की विभिन्न श्रेणी की यात्राओं को अनुमोदित करना तथा देय यात्रा व्यय एवं अन्य भत्तों को भुगतान अधिकृत करने की व्यवस्था की गयी है।

3.                    वित्तीय नियम संग्रह खण्ड - 5 भाग 2 एवं टेजरी रुल्स के प्राविधानों के अनुसार कोषागार से वित्तीय व्यवहरण किया जाता है।

4. सेवा सम्बन्धी प्रकरण तथा तद्विषयक वेतन एवं भत्तों हेतु वित्तीय नियम संग्रह खण्ड-2 भाग 2 स े4 के अनुसार यथा वांछित कार्यवाही करने तथा आदेश पारित करने की व्यवस्था की गयी है।

5.विभाग हेतु लागू सेवा नियमावलियों के अनुसार नियुक्ति प्राधिकारी के दायित्व का निर्वहन तथा चयन प्रक्रिया के अनुसार नियुक्ति/ प्रोन्नति आदेश निर्गत किये जाते हैे।

6. भविष्य निधि नियमावली के प्राविधानों के अनुसार कर्मचारियों को अस्थाई/स्थाई अग्रिम स्वीकृत करना तथा अन्तिम निष्कासन का प्राधिकार-पत्र जारी करना।

7.कोषागार से आहरित धनराशि का मासिक व्यय विवरण तैयार कर वित्त विभाग तथा महालेखाकार को निर्धारित प्रपत्र पर सूचना भेजना तथा महालेखाकार से लेखों का मिलान करना।

8.बजट मैनुअल के अनुसार निर्धारित तिथि पर बजट प्राकलन (इस्टीमेट) तथा नई मांग (यदि आवश्यक हो) शासनको भेजना, अधीनस्थ कार्यालयों को समय से बजट आवंटन, अधीनस्थकार्यालयों अथवा किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा समय से आदेशों का सही अनुपालन न कियाजाय तब तथ्यों पर विचार कर नियमानुसार कार्यवाही करना।

9.आचार संहिता, वित्तीय अनियमित्ता, किसी अपराधिक कृत्य की स्थिति मे अधीनस्थ कर्मचारियांे के विरुद्ध स्थापित प्रक्रिया के अधीन अनुशासनात्मक कार्यवाही करना ।

10.जनहित या प्रशासनिक आधार पर यथावश्यक अधीनस्थ कर्मचारियों का स्थानांतरण /पटलपरिवर्तन/ कार्य विभाजन सभी आदेश

13.विभाग से सम्बन्धित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की चिकित्सा प्रतिपूर्ति के प्रकरण में औपचारिकतायें पूर्ण होने पर नियमानुसार समय बद्ध कार्यवाही करना।

14.शासन के कार्मिक विभाग, वित्त विभाग तथा अन्य शासन के विभागों द्वारा दिये गये विघि अनुरुप आदेशों का समय से अनुपालन सुनिष्चित करना।

15.किसी विशेष परिस्थिति या जहां नियमों/ प्रक्रियााओं से लोकहित के कार्याे में गतिरोध उत्पन्न हो रहा हो, शासन के संज्ञान हेतु पूरी सूचना भेजना।

16.विभाग से सम्बन्धित मुकदमों के प्रकरण में शासन से अनुमति प्राप्त कर सम्बन्धित न्यायालय को समय से स्थिति स्पष्ट करना तथा प्रभावी पैरवी करना।

17.विभाग के प्रकरण में लागू मैनुअल आफ गवनर््ामैन्ट आडर्स तथा अन्य अधिनियमों, नियमों,प्रक्रियाओं आदि का अनुपालन सुनिश्चित कराना । अधीनस्थ कार्यालयों एवं नियमों मे प्राविधान के अनुसार निर्दिष्ट कार्यालयों का निरीक्षण करनातथा निरीक्षण आख्या पर अनुपाल सुनिश्चित कराना।

(ख) उप निबंधक/सहायक निबंधकः-

(1)                  उप निबंन्धक/सहायक निबंधक अपने-अपने क्षेत्रीय कार्यालयों के कार्यालयाध्यक्ष होते हैं। उन्हें शासन द्वारा कार्यालयाध्यक्षों को समय-समय पर स्वीकृत किये गये सभी प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार प्राप्त होते हैं।

(2)                  उप निबंन्धक/सहायक निबंधक को सोसाइटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1860 तथा इंडियनपार्टनरशिप अधिनियम 1932 के प्राविधानों के अन्तर्गत सोसाइटी तथा फर्मों द्वारा निर्धारित शुल्कजमा करने के उपरान्त उन्हें पंजीकृत करते हुये पंजीकृत प्रमाण-पत्र जारी करने की शक्तियां प्राप्त है। इसके साथ ही सोसाइटी द्वारा नियमानुसार नवीनीकरण शुल्क जमा करने के उपरान्त पांच साल की आगामी अवधि के लिये नवीनीकरण करके नवीनीकरण प्रमाण-पत्र जारी करने की शक्ति प्राप्त है।

(3)                  उप निबंन्धक/सहायक निबंधक सोसाइटीज के प्रस्तावित रजिस्ट्रीकरण के विरूद्ध यदि कोई आक्षेपअथवा आपत्ति हो तो ऐसे आक्षेपों/आपत्तियों के सही पाये जाने की स्थिति में सोसाइटी के रजिस्ट्रेशन को नियमानुसार अस्वीकार कर सकते है तथा उन्हें सोसाइटी को ऐसे आक्षेपों/आपत्तियों का निराकरण करके रजिस्ट्रेषन हेतु संशोधित अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश जारी करने का अधिकार है।

(4)                  उप निबंन्धक/सहायक निबंधक सोसाइटी के नाम के परिर्वतन का रजिस्ट्रीकरण नियमानुसार उपयुक्त

न पाये जाने की स्थिति में अस्वीकृत कर सकते हैं।

(5)                  कतिपय परिस्थितियों में सोसाइटी के रजिस्ट्रीकरण रद्द करने की शक्ति उप निबंन्धक/सहायक निबंधक को प्राप्त हैं। सोसाइटी के विघटन की नियमानुसार प्रक्रिया प्रारम्भ करवाने की शक्ति भी उन्हें प्राप्त है।

(6)                  उप निबंन्धक/सहायक निबंधक लिखित आदेश द्वारा किसी सोसाइटी से एक निर्धारित समय सीमा के अन्दर लिखित सूचना अथवा अभिलेख प्रस्तुत करने के लिये कह सकते हैं तथा लेखा परीक्षा रिर्पोट आदि जांच एवं परीक्षण हेतु मंगा सकते हैं।

(7)                  अधिनियम की धारा 22 के अधीन उप निबंन्धक/सहायक निबंधक किसी भी सोसाइटी के कामकाज का अन्वेषण कर सकते है तथा अन्वेषण के प्रयोजन हेतु सोसाइटी के अभिलेखों का अधिग्रहण कर सकते हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर नियमानुसार सोसाइटी के रजिस्ट्रेशन को रद्द करने तथा विधि के अधीन सक्षम न्यायालय द्वारा सोसाइटी का विघटन करवा सकते है।

(8)                  यदि कोई सोसाइटी इस तरह से संचालित की जाती है जिससे सोसाइटी के उद्देश्य विफल होते हों अथवा सोसाइटी कुप्रबन्धित होती हेै या सोसाइटी के किसी अधिकारी द्वारा वैश्वासिक भंग अथवा सदृश्य आध्यताओं के भंग द्वारा क्षतिग्रस्त होती है तो उप रजिस्ट्रार/सहायक रजिस्ट्रार को यह शक्ति प्रदत्त है कि वह सोसाईटी के कामकाज का अन्वेषण अथवा सोसाइटी की किसी संस्था का निरीक्षण करे तथा शपथ के आधार पर सोसाइटी के किसी अधिकारी, सदस्य अथवा कर्मचारी का परीक्षण करने के लिये उसे बुलाये अथवा सोसाइटी के लेखा-पुस्तक सहित किन्हीं अथवा सभी अभिलेखों का अभिग्रहण करे। किसी कमी अथवा अनियमितता को दूर करने के लिये कोई निर्देश दे, जिसे न करने पर सहायक/उप रजिस्ट्रार धारा 12-घ अथवा 13-ख के अधीन सोसाइटी का रजिस्ट्रेशन रद्द करने/सोसाइटी के विघटन की कार्यवाही कर सकते हैं।

(9)                  निबन्धक /संयुक्त निबंधक/उप निबंन्धक/सहायक निबंधक की समस्त शक्तियों के विषय में सोसाइटी रजिस्ट्रेषन अधिनियम, 1860 में स्पष्ट उल्लेख किया गया है।

(10)               कार्यालय में तैनात कर्मचारियों में विभाग के कार्याें का आवंटन करना।

()                 प्रशासनिक अधिकारी/प्रधान सहायक/वरिष्ठ सहायक /कनिष्ठ सहायक/आशुलिपिक के  

कत्र्तव्य एवं दायित्वः-

(1)                  सोसाइटी के रजिस्ट्रेशन हेतु प्राप्त आवेदन-पत्रों को सोसाइटियों के रजिस्टर प्रपत्र-1 में रजिस्ट्रीकृत करना तथा रजिस्ट्रेशन हेतु प्राप्त प्रपत्रों का अधिनियम के उपबंधों के अधीन जांच एवं परीक्षण करके निबंधक/उप निबंन्धक/सहायक निबंधक की अनुमति के पश्चात निर्धारित रजिस्ट्रेशन शुल्क जमा करने के उपरान्त रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र जारी करना तथा सोसाइटी के उक्त रजिस्टर में आवश्यक प्रविष्टियां करना।

(2)                  रजिस्ट्रीकरण के प्रमाण-पत्र के नवीनीकरण हेतु प्रत्येक आवेदन-पत्र को नवीनीकरणों से सम्बन्धित रजिस्टर में तुरन्त प्रविष्टि करना। यदि आवेदन-पत्र सभी प्रकार से ठीक पाया जाता है तो निर्धारित प्रपत्र में नियमानुसार नवीनीकरण प्रमाण-पत्र जारी करने की कार्यवाही करना तथा संदर्भित रजिस्टर में सभी प्रविष्टियां पूर्ण करना।

(3)                  कार्य आवंटन आदेश के अनुसार दैनिक प्राप्तियों का रजिस्टर, रसीद बहीं, निरीक्षणों का रजिस्टर,जारी की गयी प्रतियों का रजिस्टर, निक्षेपों के सत्यापन का रजिस्टर आदि नियमानुसार बनाना वअद्यतन प्रविष्टियां करना।

(4)                  सोसाईटी/फर्मों से सम्बन्धित सभी पत्रावलियों की सुरक्षित अभिरक्षा तथा समय-समय पर आवश्यकतानुसार पत्रावलियां कार्यालयाध्यक्ष को प्रस्तुत करना तथा निर्देशित पत्रालेख तैयार करके निर्गत करना।

(5)कार्यआवंटन के अनुसार कैश बुक तथा कैश की सुरक्षित अभिरक्षा रखना तथा नियमानुसार प्राप्त कैश को राजकोष में जमा करना।

(6)    कार्य आवंटन के अनुसार कार्यालय सम्पत्ति का लेखा जोखा रखना तथा अनुश्रवण करना ।